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Holi Kia Hai ? Holi Kyun Manate Hain ? History Of Holi In Hindi – 2019

हेलो दोस्तो स्वागत है आपका ProHindiGuide.com में। दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे की Holi Kia Hai ? Holi Kyu Manate Hain ? दोस्तों आर्टिकल को ध्यान से पढ़ें। तो चलिए सुरु हैं।

होली क्या है ?

होली एक प्राचीन त्यौहार है। और होली प्राचीन हिंदू त्यौहारों में से एक है और यह होली लगभग ईसा मसीह के जन्म के कई सदियों पहले से मनाया जा रहा है। होली का वर्णन जैमिनि के पूर्वमिमांसा सूत्र और कथक ग्रहय सूत्र में भी है।

प्राचीन भारत के मंदिरों की दीवारों पर भी होली की मूर्तियां बनी हैं। ऐसा ही 16वीं सदी का एक मंदिर विजयनगर की राजधानी हंपी में है। इस मंदिर में होली के कई दृश्य हैं जिसमें राजकुमार, राजकुमारी अपने दासों सहित एक दूसरे पर रंग लगा रहे हैं।

कई मध्ययुगीन चित्र, जैसे 16वीं सदी के अहमदनगर चित्र, मेवाड़ पेंटिंग, बूंदी के लघु चित्र, सब में अलग अलग तरह होली मनाते देखा जा सकता है।

होली क्यों मनाते हैं ?

रंगों के त्यौहार’ के तौर पर मशहूर होली का त्योहार फाल्गुन महीने में पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। तेज संगीत और ढोल के बीच एक दूसरे पर रंग और पानी फेंका जाता है। भारत के अन्य त्यौहारों की तरह होली भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। प्राचीन पौराणिक कथा के अनुसार होली का त्योहार, हिरण्यकश्यप की कहानी जुड़ी है।

होली का इतिहास क्या है ?

झाँसी से कुछ किलोमीटर मीटर दूर येरज नगर है, जहा पर राक्षस हिर्न्यकशप का राज चलता था| कहा जाता है की ये सतयुग का सबसे क्रूर राजाओ में से एक राजा था| हिर्न्यकशप ने अपने हत्याचारो और हिंसा से सबका जीना मुश्किल कर दिया था|

हिर्न्यकशपने घोर तपश्या करके भगवान ब्रम्हदेव से ये वरदान मांगा था की वो ना रात में मरे, ना दिन में मरे, ना आकाश में मरे, ना मनुष्य से मरे, ना जानवर से मरे, ना धरती पर मरे और ना किसी तलवार हथियार से मरे|

भगवान ब्रम्हदेव से वरदान मिलने के बाद उसने संपूर्ण नगर को घोषणा कर दी की आज से भगवान विष्णु की नही बल्कि उसकी खुद की पूजा की जाएगी, और जो उसकी पूजा नही करेगा उसे मृत्युदंड दिया जायेगा| और ईसी डर से लोग राक्षस हिर्न्यकशप की पुजा करने लगे|

हिर्न्यकशप का प्रल्हाद नाम का बेटा था जो भाग्वाब विष्णु का बहुत बडा भक्त था और उनकी भक्ति, पुजा भी करता था| लेकिन हिर्न्यकशप को प्रल्हाद का भगवान विष्णु की पुजा-भक्ति करना बिलकुल भी पसंद नही था, और ईसी कारन हिर्न्यकशप ने अपने बेटे प्रल्हाद को मारने की बहुत कोशिस की लेकिन भगवान विष्णु के भक्ति के कारन प्रल्हाद हर बार बच निकले|

होली

हिर्न्यकशप की एक होलिका नाम की बहन थी उसे कोई भी आग नही जला सकती ये वरदान प्राप्त था| हिर्न्यकशप ने अपनी बहन से विनती की, की वो प्रल्हाद को अपने साथ चिता पर बिठाकर उसे मर दो| होलिका ने वैसा ही किया, एक चिता बनाई और उस चिता पर बैठ गई और अपने साथ प्रल्हाद को बिठाया और चिता जला दी|

चिता जलते वक्त प्रल्हाद भाग्वान विष्णु का नाम स्मरण करता रहा और कुछ देर बाद होलिका आग में भस्म हो गई लेकिन भगवान विष्णु के कृपा से प्रल्हाद का बाल भी बाका नही हुआ|और अंत में भाग्वाब विष्णु ने नार्शिहा का अवतार लिया जो आधा मानव शरिर था और आधा शेर का शरिर था|

भगवान नार्शिहा ने हिर्न्यकशप को अपने जांग पर सुलाकर अपने नुकीले नाखुनो से हिर्न्यकशप की छाती फाड़ दी और उसका वध कर दिया|और ईसी वजह से येरज में पहली बार होली मनाई गई, और बुराई पर जित हासिल हुई। तो दोस्तों ईसी वजह से बुराई पर जित हासिल होने पर होली मानते हैं।

रंग होली का भाग कैसे बने?

यह कहानी भगवान विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण के समय तक जाती है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण रंगों से होली मनाते थे। इसलिए होली का त्योहार रंगों के रूप में लोकप्रिय है। वे वृंदावन और गोकुल में अपने साथियों के साथ होली मनाते थे। वे पूरे गांव में मज़ाक भरी शैतानियां करते थे। आज भी वृंदावन जैसी मस्ती भरी होली कहीं नहीं मनाई जाती।

होली वसंत का त्यौहार है। और इसके आने पर सर्दियां खत्म होती हैं। कुछ हिस्सों में इस त्यौहार का संबंध वसंत की फसल पकने से भी है। किसान अच्छी फसल पैदा होने की खुशी में होली मनाते हैं। होली को ‘वसंत महोत्सव’ या ‘काम महोत्सव’ भी कहते हैं।

होली के रंग

पहले होली के रंग टेसू या पलाश के फूलों से बनते थे और उन्हें गुलाल कहा जाता था। वो रंग त्वचा के लिए बहुत अच्छे होते थे क्योंकि उनमें कोई रसायन नहीं होता था। लेकिन समय के साथ रंगों की परिभाषा बदलती गई।

आज के समय में लोग रंग के नाम पर कठोर रसायन का उपयोग करते हैं। इन खराब रंगों के चलते ही कई लोगों ने होली खेलना छोड़ दिया है। हमें इस पुराने त्यौहार को इसके सच्चे स्वरुप में ही मनाना चाहिए।

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तो दोस्तों यह था हौली का इतिहास। हम आशा करते हैं आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा। अगर पसंद आया तो दोस्तों कमेंट करके जरूर बताएं।



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Kasim Saifi

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